CDS Anil Chauhaan- राष्ट्रीय सुरक्षा, सामरिक चिंतन और स्वदेशी रणनीति जैसे गंभीर विषयों पर शुक्रवार को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल (केंद्रीय) विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, कार्यक्रम में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान ने शिरकत करते हुए छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया और उन्हें रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
अपने संबोधन में सीडीएस ने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सशक्त बनाने में समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है उन्होंने यह धारणा भी खारिज की कि भारत में सामरिक शोध की परंपरा कमजोर रही है।
CDS Anil Chauhaan- उन्होंने कहा कि पौराणिक काल से ही भारत में सामरिक चिंतन की समृद्ध परंपरा रही है। धनुर्वेद में व्यूह रचना, धनुर्विद्या और सेना संचालन का विस्तृत वर्णन मिलता है, जबकि अर्थशास्त्र और चाणक्य नीति में राज्य सुरक्षा, शक्ति संतुलन और कूटनीतिक रणनीतियों का स्पष्ट उल्लेख है। सीडीएस ने कहा कि चाणक्य की रणनीतिक दृष्टि आज भी भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सोच में परिलक्षित होती है।

इतिहास का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि मुगल काल के दौरान भारत की सामरिक सोच कमजोर पड़ी। 1947 में देश को भौतिक स्वतंत्रता मिली, लेकिन मानसिक स्वतंत्रता प्राप्त करने में समय लगा। उन्होंने युवाओं से मौलिक और स्वदेशी सोच अपनाने का आह्वान किया और कहा कि केवल पश्चिमी रणनीतियों पर आधारित योजनाओं से स्थायी सफलता संभव नहीं है। हथियार, युद्ध नीति और रणनीति यदि मौलिक हों, तो ही निर्णायक परिणाम मिलते हैं।
CDS Anil Chauhaan- कार्यक्रम के अंत में सीडीएस ने छात्रों के प्रश्नों का उत्तर दिया। पूरे संवाद के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर और बौद्धिक चर्चा देखने को मिली, जिससे छात्रों में राष्ट्रहित और सामरिक दृष्टिकोण के प्रति नई समझ विकसित हुई।