Gauchar Mela 2025- चमोली जिले का ऐतिहासिक गौचर राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेला आज 14 नवंबर से पूरे धूमधाम के साथ शुरू हो गया है। सात दिनों तक चलने वाले इस मेले का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया।
Gauchar Mela 2025- इस मौके पर मंच पर सम्मान का विशेष पल देखने को मिला
पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. हरीश मैखुरी को पंडित गोविन्द प्रसाद नौटियाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
वहीं वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद डॉ. नंद किशोर हटवाल को पंडित महेशानन्द नौटियाल शिक्षा एवं साहित्य प्रसार सम्मान प्रदान किया गया।
अपर गढ़वाल के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित मेलों में शामिल यह मेला अब राज्य स्तर से आगे बढ़कर राष्ट्रीय पहचान की ओर कदम बढ़ा चुका है। बीते 9 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “एक जिला–एक मेला” पहल का उल्लेख किए जाने के बाद गौचर मेले को अब पूरे देश में एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
Gauchar Mela 2025- इतिहास समेटे हुए है गौचर मेला
वर्ष 1943 में भोटिया जनजाति और स्थानीय लोगों की पहल पर शुरू हुआ यह मेला उस समय भारत–तिब्बत व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था। समय के साथ इस मेले ने औद्योगिक विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों का आधुनिक स्वरूप ग्रहण कर लिया।
Gauchar Mela 2025- आज इस मेले में मूल व्यापारिक परंपरा, स्थानीय उत्पाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, आधुनिक आकर्षण और नए आयोजनों का शानदार मिश्रण देखने को मिलता है।
व्यापार मंडल के जिला महामंत्री सुनील पंवार बताते हैं
- “गौचर मेले की अपनी अलग राज्य स्तरीय पहचान है, इसी महत्व को देखते हुए सरकार ने इसे राजकीय मेला घोषित किया है।”
- सात दिनों तक यह मेला पूरे क्षेत्र में रौनक, रोजगार और सांस्कृतिक उत्सव का बड़ा केंद्र बना रहेगा।


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