Tharali Disaster Investigation- चमोली जिले के थराली क्षेत्र में हाल ही में आई आपदा की वैज्ञानिक जांच शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने 23 अगस्त को तीन प्रमुख संस्थानों – वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) और उत्तराखंड लैंडस्लाइड मैनेजमेंट एंड मिटिगेशन सेंटर (ULMMC) के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम को घटनास्थल पर भेजा। यह टीम आपदा के कारणों की गहराई से जांच कर रही है।
जांच का उद्देश्य और प्रक्रिया
विशेषज्ञों का यह दल प्रभावित क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति, वर्षा की तीव्रता, भूस्खलन की घटनाएं और नदियों की दिशा में हुए परिवर्तनों का वैज्ञानिक अध्ययन कर रहा है। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यह टीम आपदा के मूल कारणों की पहचान करेगी और इससे निपटने के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक सुझाव प्रस्तुत करेगी। जांच रिपोर्ट में आपदा न्यूनीकरण (mitigation) के लिए भी उपाय सुझाए जाएंगे।
Tharali Disaster Investigation- लगातार बढ़ती घटनाएं
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से क्षेत्र में भारी वर्षा, अचानक भूस्खलन और नदियों के बहाव में बदलाव जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी तरह की असामान्य गतिविधियां थराली आपदा का कारण हो सकती हैं, जिनका अब वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषण किया जा रहा है।
गौरतलब है कि 14 अगस्त को उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में भी इसी तरह की आपदा के बाद वैज्ञानिकों की टीम भेजी गई थी। उस दल में वाडिया इंस्टीट्यूट, CBRI रुड़की, IIT रुड़की, GSI और राज्य भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के विशेषज्ञ शामिल थे। धराली की रिपोर्ट भी जल्द शासन को सौंपे जाने की उम्मीद है।
Tharali Disaster Investigation- नीति निर्माण में होगा उपयोग
राज्य सरकार का कहना है कि उत्तराखंड जैसे आपदा-प्रवण क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान और विशेषज्ञों की सिफारिशें दीर्घकालिक नीति निर्माण की नींव बनेंगी। थराली आपदा पर आधारित रिपोर्ट आने वाले महीनों में प्रस्तुत की जाएगी, जिसके आधार पर सरकार स्थायी समाधान और पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।


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