Uttarakhand Census 2027- उत्तराखंड के हिमाच्छादित क्षेत्रों में 17 अगस्त से जनगणना

Uttarakhand Census 2027- उत्तराखंड के हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना-2027 के दूसरे चरण की प्रक्रिया 17 अगस्त 2026 से शुरू होने जा रही है। इस चरण में पहले 15 दिनों तक लोगों को डिजिटल स्व-गणना का विकल्प मिलेगा। इसके बाद 1 से 30 सितंबर 2026 तक प्रगणक घर-घर जाकर जनसंख्या गणना का कार्य करेंगे। केंद्र सरकार के अनुसार उत्तराखंड के हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।

इस बार जनगणना को पहले की तुलना में अधिक आधुनिक और व्यापक बनाया गया है। पारंपरिक जनसांख्यिकीय जानकारी के साथ शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, रोजगार, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और अन्य सामाजिक-आर्थिक पहलुओं से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाएगी।

Uttarakhand Census 2027- 17 अगस्त से शुरू होगी डिजिटल स्व-गणना

हिमाच्छादित क्षेत्रों के लोगों को पहले 15 दिन तक ऑनलाइन स्व-गणना का अवसर मिलेगा। इसके बाद प्रगणक संबंधित क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर जानकारी का सत्यापन और जनगणना का कार्य करेंगे।

जनगणना-2027 में पहली बार देशभर में डिजिटल डेटा संग्रह के साथ स्व-गणना की सुविधा शुरू की गई है। उत्तराखंड में भी पहले चरण के दौरान इस सुविधा का इस्तेमाल किया जा चुका है।

Uttarakhand Census 2027

Uttarakhand Census 2027- चार जिलों के 131 गांव और तीन नगर निकाय शामिल

Uttarakhand Census 2027- उत्तराखंड के चार जिलों के कुल 131 गांव और तीन नगर पंचायतें हिमाच्छादित क्षेत्र की श्रेणी में आती हैं। इन क्षेत्रों की अनुमानित आबादी करीब 52 हजार बताई गई है।

  • उत्तरकाशी: 69 गांव और गंगोत्री नगर पंचायत
  • चमोली: 23 गांव और बदरीनाथ नगर पंचायत
  • रुद्रप्रयाग: 4 गांव और केदारनाथ नगर पंचायत
  • पिथौरागढ़: 35 गांव

इन सभी क्षेत्रों में जनगणना के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, क्योंकि भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण यहां सामान्य क्षेत्रों की तुलना में अलग समय-सारिणी के अनुसार जनगणना कराई जाती है।

Uttarakhand Census 2027- 162 प्रगणक और 34 सुपरवाइजर तैनात

Uttarakhand Census 2027- हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना का काम सुचारू रूप से पूरा कराने के लिए 162 प्रगणक और 34 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, संबंधित क्षेत्रों में कर्मचारियों की तैनाती और आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

पर्वतीय और दुर्गम इलाकों को देखते हुए प्रगणकों को निर्धारित क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर डेटा जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है।

Uttarakhand Census 2027

इस बार डिजिटल साक्षरता की भी होगी गणना

जनगणना-2027 में लोगों से पहले की तुलना में अधिक विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें साक्षरता के साथ डिजिटल साक्षरता से संबंधित जानकारी भी शामिल होगी।

इसके अलावा कोविड-19 टीकाकरण से संबंधित जानकारी, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे।

Uttarakhand Census 2027- रोजगार से जुड़े सवाल भी होंगे

Uttarakhand Census 2027- जनगणना में लोगों से पिछले वर्ष की गतिविधियों के आधार पर कामकाज, आर्थिक गतिविधि की श्रेणी, व्यवसाय और उद्योग के स्वरूप से संबंधित जानकारी ली जाएगी। इसके साथ ही व्यक्ति के कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए किए जाने वाले आवागमन से जुड़े सवाल भी शामिल होंगे।

इससे देश में रोजगार के स्वरूप, आर्थिक गतिविधियों और लोगों की कार्यस्थल तक पहुंच से जुड़ी तस्वीर को समझने में मदद मिलेगी।

प्रवास और निवास की जानकारी भी जुटाई जाएगी

जनगणना के दौरान व्यक्ति के जन्म स्थान, पूर्व निवास स्थान, स्थान परिवर्तन का कारण और वर्तमान निवास की अवधि से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

इससे उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में आबादी के स्थानांतरण और प्रवास की स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध होने की उम्मीद है।

Uttarakhand Census 2027- हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना?

देश के अधिकांश हिस्सों में जनसंख्या गणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में प्रस्तावित है, लेकिन उत्तराखंड के हिमाच्छादित और गैर-सिंक्रोनस क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक एवं मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए जनगणना पहले कराई जा रही है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार इन क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 रखी गई है।

उत्तराखंड के हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना का यह चरण राज्य की जनसांख्यिकीय तस्वीर को अपडेट करने के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता, रोजगार, प्रवास और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाने में अहम भूमिका निभाएगा।

यह भी पढ़ें…

उत्तराखंड की ये हैं 5 बेस्ट डेस्टिनेशन वेडिंग लोकेशन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *