Naina Devi Mandir- नैनीताल के मल्लीताल स्थित नयना देवी मंदिर शहर ही नहीं, बल्कि देश और विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है, नवरात्र के दौरान नगर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ पर्यटक भी मां के दर्शन के लिए यहां आते हैं, नौ दिनों तक विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं का ताता लगा रहता है और अष्टमी-नवमी के दिन मंदिर में पूजा-अर्चना की भीड़ चरम पर होती है।
माना जाता है कि यह मंदिर शक्तिपीठ के रूप में मान्यता रखता है और अब इसे मानसखंड मंदिर माला मिशन में भी सम्मिलित किया गया है।
Naina Devi Mandir- मंदिर का इतिहास
उन्नीसवीं शताब्दी में नगर निवासी मोती लाल साह ने झील किनारे बोट हाउस क्लब के समीप मां नयना देवी का मंदिर बनवाया था। 1880 में भूस्खलन के कारण मंदिर नष्ट हो गया। कहा जाता है कि मोती लाल साह के पुत्र अमरनाथ साह को मां ने स्वप्न में दर्शन देकर मूर्ति का स्थान बताया। इसके बाद उन्होंने वर्तमान स्थल पर 1883 में मंदिर का निर्माण करवाया। 1984 में मंदिर की व्यवस्थाएं अमर उदय ट्रस्ट के हाथ में आ गईं।
नयना देवी मंदिर से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। मान्यता है कि मां नयना देवी हर श्रद्धालु की मुराद पूरी करती हैं। नवरात्र में मंदिर परिसर में कन्या पूजन, नारियल चढ़ावा और अन्य विशेष अनुष्ठान संपन्न होते हैं। नौ दिनों तक चलने वाले अनुष्ठानों के अंत में एकादशी को भव्य डोला यात्रा का आयोजन होता है। पूरे शहर में भ्रमण के बाद मां की मूर्तियों का झील के दूसरे किनारे विसर्जन किया जाता है।

Naina Devi Mandir- मुख्य पुजारी बसंत बल्लभ पांडे बताते हैं कि “मां नयना देवी न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि देश-विदेश से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था का केंद्र हैं। यहां पूजा-अर्चना करने से भक्तों की हर मुराद पूरी होती है।”
मंदिर की आस्था और भक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मानसखंड योजना के तहत मंदिर परिसर का विस्तार और सुंदरीकरण किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी सुरेश मेलकानी के अनुसार, मंदिर में हर साल देश-विदेश से लाखों भक्तजन आते हैं, और मुख्य पर्व पर श्रद्धालुओं की भीड़ चरम पर होती है।
Naina Devi Mandir- नयना देवी मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से भी नैनीताल का प्रमुख केंद्र बन गया है।