Kumaon Khadi Holi- कुमाऊं में फाल्गुन की रंगत के साथ होली का उल्लास चरम पर पहुंच गया है, आंवला एकादशी के पावन अवसर पर चीर बंधन के साथ पारंपरिक खड़ी होली का विधिवत शुभारंभ हुआ, मंदिरों, चौकों और गांव-गांव में ढोल-दमाऊं की थाप, शास्त्रीय रागों और भक्ति गीतों के बीच पूरे क्षेत्र में सांस्कृतिक उत्साह की अनूठी छटा दिखाई दी।
हल्द्वानी शहर में होली ग्राउंड सिंधी चौराहा और पटेल चौक पर सुबह नौ बजे विधिपूर्वक चीर बंधन किया गया, ज्योतिषाचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी के अनुसार चीर बंधन का शुभ मुहूर्त सुबह 7:30 बजे से 11:30 बजे तक रहा, वहीं श्री बुद्धि बल्लभ पंचांग के आचार्य पवन पाठक ने बताया कि इस वर्ष प्रतिपदा वृद्धिगामिनी है। सामान्यतः तीन मार्च की प्रदोष बेला में होलिका दहन होना था, लेकिन चंद्र ग्रहण के कारण ग्रहण का नियम लागू होगा। शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण की स्थिति में भद्रा रहित पूर्णिमा में रात्रि में होलिका दहन किया जाना चाहिए। ऐसे में तीन मार्च को प्रातः 5:29 बजे से 6:30 बजे तक का समय होलिका दहन के लिए शास्त्रसम्मत माना गया है। ग्रहण के चलते चार मार्च को होली उत्सव मनाया जाएगा।
Kumaon Khadi Holi- जागेश्वर धाम में खड़ी होली का आगाज़
Kumaon Khadi Holi- अल्मोड़ा जिले के विश्वप्रसिद्ध जागेश्वर धाम में चीर बंधन के साथ पारंपरिक खड़ी होली का शुभारंभ हुआ। देवदार के घने वनों से घिरे इस पवित्र धाम में श्रद्धालुओं और होल्यारों ने भगवान शिव के मंदिर प्रांगण में चीर बांधकर होली उत्सव की शुरुआत की। ढोल-दमाऊं की थाप और पारंपरिक रागों पर आधारित होली गीतों ने पूरे क्षेत्र को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।
इतिहासकारों के अनुसार जागेश्वर क्षेत्र में खड़ी होली की परंपरा कत्यूरी शासनकाल से जुड़ी मानी जाती है। कुमाऊं में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि शास्त्रीय संगीत और भक्ति परंपरा से जुड़ा सांस्कृतिक उत्सव है। मंदिर परिसरों में गोल घेरा बनाकर गाई जाने वाली खड़ी होली में शिव और विष्णु स्तुति के साथ राधा-कृष्ण के पद भी शामिल होते हैं। जागेश्वर धाम, जिसे बारह ज्योतिर्लिंगों की मान्यता से भी जोड़ा जाता है, सदियों से धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र रहा है।
बागेश्वर नगर स्थित बागनाथ मंदिर में एकादशी के अवसर पर चीर बंधन कर खड़ी होली गायन का शुभारंभ हुआ। भगवान शिव को अबीर-गुलाल अर्पित कर होल्यारों ने “कैलै बांधी चीर हो रघुनंदन राजा” और “होली शिव के मन माही बसे काशी” जैसे पारंपरिक गीतों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल ने बताया कि चतुर्दशी के दिन मंदिर परिसर में जिले के विभिन्न गांवों की होलियों का समागम आयोजित किया जाएगा, जिसमें दूर-दराज से होल्यार भाग लेंगे।

Kumaon Khadi Holi- गांव-गांव रंगभरणी होली
Kumaon Khadi Holi- जिले के गरुड़, कपकोट, कांडा, काफलीगैर, दुगनाकुरी और शामा तहसील के गांवों में भी रंगभरणी होली की शुरुआत हो चुकी है। पुरुषों और महिलाओं की टोलियां घर-घर जाकर होली गायन करेंगी। होल्यार एक सप्ताह तक उत्सव की उमंग में डूबे रहेंगे।
छलड़ी के दिन पारंपरिक रूप से रंगों की होली खेली जाएगी, जबकि अगले दिन टीका पर्व के साथ उत्सव का विधिवत समापन होगा।
कुमाऊं की खड़ी होली केवल पर्व नहीं, बल्कि लोकआस्था, सामूहिकता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है—जहां संगीत, भक्ति और परंपरा एक साथ रंगों में घुलकर समाज को एकसूत्र में बांधते हैं।