Ayush Uttarakhand- एलोपैथी और आयुर्वेद मिलकर विकसित करेंगे मॉडल आयुष चिकित्सा

Ayush Uttarakhand- उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जड़ी-बूटियों के समृद्ध भंडार का लाभ उठाने और आयुर्वेदिक चिकित्सा को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वाकांक्षी कदम उठाए हैं, इसके तहत राज्य में आयुष चिकित्सा के विकास और गुणवत्ता सुधार को प्राथमिकता दी जा रही है, भारत सरकार के नेशनल आयुष मिशन के तहत प्रदेश में आयुष सेवाओं के विस्तार और बेहतर संचालन की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने बैठक में स्पष्ट किया कि एलोपैथी और आयुर्वेद मिलकर उत्तराखंड में मॉडल आयुष चिकित्सा विकसित करेंगे। प्रदेश के 30 बेड और 10 बेड वाले आयुष चिकित्सालयों को प्रभावी ढंग से प्रचारित करने, संचालन और सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया गया। सभी संस्थाओं को निर्देश दिए गए कि वे समान्वयित रूप से काम करते हुए राज्य के लोगों को आयुष चिकित्सालयों का लाभ उपलब्ध कराएं।

Ayush Uttarakhand- बैठक में पीपीपी मोड पर संचालित आयुष चिकित्सालयों के रिस्पांस की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने आयुष सचिव को प्राइवेट पार्टनर्स के साथ पूर्व में हुए एमओयू की समीक्षा करने, उनके अनुभव और समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

आयुष विभाग की ओर से भारत सरकार को 52 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजने की तैयारी की गई है। इस प्रस्ताव के तहत इस वित्तीय वर्ष में 13 जिलों में 13 सुप्रजा केंद्र (आयुर्वेदिक एंटेनेटल केयर आधारित) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में पंचकर्म सुविधाएं, विशेषज्ञ चिकित्सा और प्रशिक्षित पंचकर्म सहायकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

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प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आयुष अस्पतालों का निर्माण और संचालन भी जारी है। पथरी (हरिद्वार), भीमताल (नैनीताल) और टनकपुर (चंपावत) के अस्पताल इस वित्तीय वर्ष में तैयार हो जाएंगे, जबकि हल्द्वानी (नैनीताल) में निर्माण कार्य प्रगति पर है। साथ ही, हर जिले में मोबाइल मेडिकल यूनिट के संचालन का प्रस्ताव रखा गया है।

Ayush Uttarakhand- आयुष विभाग की वेबसाइट पर ‘आयुर तरंगिणी’ मासिक ई-मैगजीन और यूट्यूब पर ‘आयुर वाणी’ पॉडकास्ट सीरीज के माध्यम से आम जनता को आयुष चिकित्सा की जानकारी और सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल से उत्तराखंड में आयुष चिकित्सा का अधिकतम प्रचार-प्रसार और स्वास्थ्य सेवाओं का विकास सुनिश्चित होगा।

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