Chanting name of Shri Ram- रामचरित मानस विमल, संतन जीवन प्राण, हिन्दुअन को वेदसम जमनहिं प्रगट कुरान’ यह दोहा गोस्वामी तुलसीदास के समकालीन रहे अब्दुल रहीम खान-ए-खाना (रहीम दास) ने लिखा था। जिसका अर्थ है कि रामचरित मानस हिंदुओं के लिए ही नहीं मुसलमानों के लिए भी आदर्श है। इसी तरह कृष्ण भक्ति में पूरा जीवन न्यौछावर करने वाले रसखान लिखते हैं कि…’हरि के सब आधीन पै, हरी प्रेम आधीन। याही ते हरि आपु ही, याहि बड़प्पन दीन॥ मतलब यह कि पूरी दुनिया परमेश्वर के अधीन है लेकिन परमेश्वर (हरि) स्वयं भक्त के प्रेम के अधीन हैं।
ये एक दो उदाहरण नहीं हैं, जिनके आधार पर मुस्लिमों में राम के प्रति प्रेम का वर्णन किया जाए। इतिहास में कई ऐसे मुस्लिम कवि और रचनाकार हुए जो कहने को तो मुस्लिम थे लेकिन वो राम नाम जपते थे। उनमें फरीद, रसखान, आलम रसलीन, हमीदुद्दीन नागौरी, अमीर खुसरो जैसों का नाम लिया जा सकता है।
Chanting name of Shri Ram- आधुनिक भारत में भी कई रचनाकारों ने राम की काव्य-पूजा की और उनके प्रेम की गाथाएं लिखीं। अल्लामा इकबाल ने श्रीराम को इमाम ए हिंद बताया सन् 1860 में रामायण का उर्दू अनुवाद करके प्रकाशित किया गया। उस समय 8 साल में उसके 16 संस्करण प्रकाशित करने पड़े।

अल्लामा इकबाल ने ब्रिटिश काल (1908) में लिखा था – ‘हैं राम के वजूद पे हिंदुस्तान को नाज़, अहल-ए-नज़र समझते हैं इमाम-ए-हिंद’ यानी राम केवल हिंदुओं के भगवान नहीं हैं, बल्कि दूरदृष्टि वाले या बुद्धिमानों के लिए ‘इमाम-ए-हिंद’ (पूरे भारत के आध्यात्मिक नेता) हैं।
रामभक्त, मुस्लिम रचनाकार अब्दुल रशीद खां, नसीर बनारसी, मिर्जा हसन नासिर, दीन मोहम्मद्दीन इकबाल कादरी, जफर अली खां जैसे कई प्रमुख मुस्लिम विद्वान हुए जिन्होंने रामभक्ति से ओत प्रोत रचनाएं लिखीं।
Chanting name of Shri Ram- लखनऊ के मिर्जा हसन नासिर ने रामस्तुति में लिखा .. कंज-वदनं दिव्यनयनं मेघवर्णं सुन्दरं। दैत्य दमनं पाप-शमनं सिन्धु तरणं ईश्वरं।। गीध मोक्षं शीलवन्तं देवरत्नं शंकरं। कोशलेशम् शांतवेशं नासिरेशं सिय वरम्।। इन मुस्लिम गीतकारों के लिखे बेहतरीन रामभजन बॉलीवुड में लिखे गए कई भजनों को लोग आज आस्था के साथ खूब गाते हैं।
लेकिन, एक सच ये है कि इनमें से अधिकतर भजनों को मुस्लिम गीतकारों ने लिखा है। इन्हीं में एक भजन है। जिसे मुस्लिम गीतकार साहिर लुधियानवी ने लिखा है। हे रोम-रोम में बसने वाले राम, जगत के स्वामी हे अंतर्यामी, मैं तुझसे क्या मांगू।
इसी तरह फिल्म ‘लगान’ का एक प्रसिद्ध भजन है। ‘ओ पालनहारे निर्गुण और न्यारे’ इस भजन को गीतकार जावेद अख्तर ने लिखा और कंपोज ए. आर. रहमान ने किया है।


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